आध्र्ामत्िकता व नैमतकता के एकीकरण के सन्दिय िें रािकृष्ण मििन का िैमक्षक र्ोगदान
Abstract
श्आत्मानों मोक्षाथं जगद् महताय चश्ए स्ियं के उिार के मलए तथा मिश्व के कल्याण के मलएष्ए आदशय िा्य के साथ रामकृष्ण ममशन एिं रामकृष्ण मठ की स्थापना की गई थी। इस आदशय िा्य को तैयार करने का िेय स्िामी मििेकानंद को जाता है। स्िामी मििेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस जी का कहना था मकए भगिान तक पहुंचने के हमारे रास्ते अलग.अलग हो सकते हैं लेमकन अंत में सभी रास्ते भगिान तक ही पहुंचते है। उनका मानना यह भी था मक एक भक्त को िुरे मिचारों से और िुरे आचरण से िचना चामहए तभी िह ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकता है। स्िामी मििेकानंद का उद्देश्य ऐसे साधुओं और संन्यामसयों को संगमठत करना था जो रामकृष्ण परमहंस की मशक्षाओं में गहरी आस्था रखेंए उनके उपदेशों को जनसाधारण तक पहुंचा सके और संतप्त दुखी एिं पीमडत मानि जामत की मनस्िाथय सेिा कर सके। प्रस्तुत अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य रामकृष्ण ममशन द्वारा संचामलत शैमक्षक काययक्रमों का अध्ययन करना है तथा रामकृष्ण ममशन द्वारा संचामलत मिश्वमिद्यालय का गहन अध्ययन करना है। प्रस्तुत अध्ययन हेतु मद्वतीयक स्रोतों का प्रयोग करते हुए िणयनात्मक एिं मिश्लेषणात्मक मिमधयों का उपयोग मकया गया है।
मुख्य शब्द . रामकृष्ण ममशनए शैमक्षक काययए समग्र मशक्षा ।