प्राचीन भारत में पंचमहाभूतों के सन्दर्भित पर्ािवरण संपोषण

Authors

  • चन्रकेतु र्संह शोधार्थी, इतिहास संस्कृति एवं पुराित्व तवभाग, डॉ0 राममनोहर लोतहया अवध तवश्वतवद्मालय अयोध्या (उ0प्र0) Author
  • डॉ0 राजेश कुमार र्संह सह-आचायय, इतिहास संस्कृति एवं पुराित्व तवभाग डॉ0 राममनोहर लोतहया अवध तवश्वतवद्मालय, अयोध्या (उ0प्र0) Author

Keywords:

प्राचीन भारि, पंचमहाभूि, पयायवरण

Abstract

भारतीय वाड्.मय में‘पंचमहाभूतों’ को सृष्टि रचना का आधार एवं संतुलन का मूलाधार माना गया है। इन भूतों से ही सृष्टि की स्वस्थ ष्टनरंतरता सम्भव है। इस कारण हमारे प्राचीन ग्रन्थ- वेद में पंचमहाभूतों को पयाावरण संपोषण का अष्टभन्न अंग माना गया है। पृथ्वी, जो सम्पूणा जीवों, वनस्पष्टतयों एवं पवात-जंगलों आष्टद को धारण करती है, को माता का दजाा प्रदान कर सबकी जननी एवं सम्पोषक मानकर उसकी स्वस्थता को मानव का प्राथष्टमक उत्तरदाष्टयत्व बताया गया है। जल, जीवन का आधार तत्त्व है, ष्टजससे जल-स्रोतों का उन्नयन, संरक्षण, सुरक्षा एवं स्वच्छता को बनाये रखने का ष्टवधान हमारे प्राचीन ग्रंथों में ष्टकया गया है। अष्टनन, हमारे अंदर ष्टनष्टहत ष्टवकारों का दहन कर मानव उपयोगी सामष्टग्रयों का सम्पोषण करती है, ष्टजससे इसे साक्षी मानकर पष्टवत्रता की शपथ का प्रावधान ष्टकया गया है। आकाश, पंचमहाभूतों में से एक है, ष्टजसका ष्टवधान शून्य रूप में ष्टलया जाता है, ष्टजससे समस्त सृष्टि का संतुलन बना रहे। वायु, को प्राण-वायु नाम से हमारे ऋष्टषयों ने सम्बोष्टधत ष्टकया है, इसके द्वारा वातायन का काम सम्पन्न ष्टकया जाता है और मानव जीवन के ष्टलए आक्सीजन जैसी महत्वपूणा तत्त्व का सम्पेषण, तो पेड़-पौधों के ष्टलए काबान डाई-आक्साईड का सम्पेषण इसके द्वारा ष्टकया जाता है। हमारे शास्त्रों में उन्नचास कोष्टि के वायु की चचाा की गयी है, ष्टजसके बारे में वतामान ष्टवज्ञान को भी पूणा संज्ञान नहीं है। संक्षेप में, पंचमहाभूत और पयाावरण संपोषण एक ही ष्टसक्के के दो पहलू हैं। प्रस्तुत शोधपत्र इसी के सन्दष्टभात ष्टद्वतीयक तथ्यों के आधार पर ऐष्टतहाष्टसक पद्धष्टत का प्रयोग कर अन्वेषणात्मक एवं ष्टववेचनात्मक प्रणाष्टलयों के द्वारा ष्टवश्लेष्टषत ष्टकया गया है।

References

Published

2025-09-30