अमृतलाल नागर की कहानी हाजी कुल्फीवाला का तृकुल्ुल्फीवाला सामाजिक विश्लेष्ेषण

Authors

  • ममता यादव सहायक आचार्य भारतीय विद्या भवन बालिका महाविद्यालय, लखनऊ Author

Keywords:

निमिष, सर्टिफिकेट, तहजीब-याफ्ता, कुल्फियाँ, कल्लेदराज, मुश्तरी

Abstract

अमृतलाल नागर जी द्वारा रचनाओं में उनका विषय वस्तु पर किया गया शोध उनकी रचनाओं को ख़ास बनाता है अपनी रचनाओं में उन्होंने अपने आस पास के समाज की घटनाओं को वास्तविकता के साथ कागज़ पर उतारने की कोशिश की है लखनऊ के जनजीवन और बोली का जितना शानदार चित्रण
 अमृतलाल नागर जी की रचनाओं में मिलता है उतना शायद कहीं नहीं। उनकी लिखी कहानियो मे से एक कहानी हाजी कुल्फीवाला का सामाजिक विश्लेषण निम्न शोध पत्र में दिया गया है। यह कहानी चैक के आस पास लखनऊ के एक बूढ़े आदमी हाजी कुल्फीवाला के संघर्ष और सामाजिक द्रष्टिकोण की है। इस कहानी का मुख्य किरदार अपना अच्छा आचरण और अनुभव प्रयोग करते हुए विकट परिस्थितियों में भी बेहतर कार्य करता है। इस कहानी में अमृतलाल नगर जी द्वारा कही गयी बात वर्तमान परिस्थितियो में भी सार्थक सिद्ध होती है और व्याहारिक तोर पर समाज के लिए एक मार्ग प्रशस्त करती है।

References

Published

2020-09-29