वेदो में अन्तर्निहित नारी-स्वरूप
Abstract
नारी स्नेह, त्याग, समर्पण की प्रतिमूर्ति है। यह दुष्ट मर्दन में चण्डी, संग्राम में कैकेयी, श्रद्धा में शबरी, सौन्दर्य में दमयन्ती, सुगृहिणी में सीता, अनुराग में राधा, विद्वत्ता में गार्गी और राजनीति में लक्ष्मीबाई है। स्त्री ही समग्र सृष्टि की अधिष्ठात्री है नारी से परिवार बनता है और आगे बढ़ता है। पुरुष और स्त्री के व्यक्तित्व का विकास एक-दूसरे का पूरक है। किसी भी देश की सभ्यता और संस्कृति का मानदण्ड उस देश की नारी को ही माना जाता है। नारी का अपमान मानवता का सबसे बड़ा अपराध है। इसकी उपेक्षा मनुष्य के अस्तित्व को जर्जर, नीरस और व्यर्थ कर देती है।
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2021-09-29
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Articles