मनोवैज्ञाननक दृढ़ता के निए श्रीमद्भगवद्गीता का अनुप्रयोग

Authors

  • प्रकाश कुमार चंद्राकर शोधार्थी, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय विलाई (छ. ग.), हेमचन्द यादि विश्वविद्यालय, दुगग, (छ. ग.) Author
  • डॉ. डी. िक्ष्मी प्राध्यापक, विलाई मैत्री कॉलेज ररसाली, विलाई (छ. ग.) हेमचन्द यादि विश्वविद्यालय, दुगग, (छ. ग.) Author
  • डॉ सुमनिता सक्सेना पूिग वििागाध्यक्ष, वशक्षा, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय विलाई (छ. ग.), हेमचन्द यादि विश्वविद्यालय, दुगग, (छ. ग.) Author

Keywords:

श्रीमद्भगिद्गीता, मनोिैज्ञावनक दृढ़ता, विद्यार्थी ।

Abstract

प्रस्तुत अध्ययन में विद्यावर्थगयों के मनोिैज्ञावनक दृढ़ता (Psychological Hardiness) में िृवि के वलए श्रीमद्भगिद्गीता के अनुप्रयोग का अध्ययन वकया गया है। मनोिैज्ञावनक रूप से सुदृढ़ व्यवि जीिन के प्रत्येक पररवस्र्थवत से जूझने में सक्षम होता है, िह पररवस्र्थवतयों से िागता नहीं है। श्रीमद्भगिद्गीता जीिन की पररवस्र्थवतयों से विन्न एिं वनराश अजुगन को मनोिैज्ञावनक सुदृढ़ता प्राप्त कराने िाला अमर उपदेश है। इस अध्ययन में एक समूह पूिग परीक्षण-पश्च परीक्षण प्रायोवगक विजाइन (One group pre test – post test experimental design) का प्रयोग वकया गया है। इस अध्ययन में स्ितंत्र चर (independent variable) श्रीमद्भगिद्गीता तर्था आवश्रत चर (dependent variable) मनोिैज्ञावनक दृढ़ता (Psychological Hardiness) को वलया गया है। न्यादशग के रूप में कक्षा 12 िीं के 50 विद्यावर्थगयों का चयन वकया गया। अरुण कुमार वसंह द्वारा वनवमगत उपकरण Singh Psychological Hardiness Scale (SPHS) के द्वारा उनका पूिग परीक्षण वलया गया तत्पश्चात 03 माह गीता वशक्षण के उपरांत पश्च परीक्षण वलया गया। सांवययकीय विश्लेषण के वलए टी परीक्षण का प्रयोग वकया गया। दोनों परीक्षणों के स्कोर में सार्थगक अंतर पाया गया वजससे स्प???? होता है वक श्रीमद्भगिद्गीता का पठन करने से, उनके उपदेशों को हृदयांगम करने से तर्था जीिन में गीतोपदेश को अमल करने से व्यवि के मनोिैज्ञावनक दृढ़ता में िृवि होती है, िह अवधक सकारात्मक विचारों से युि हो जाता है तर्था विपरीत पररवस्र्थवतयों से सामना करने के वलए स्ियं को अवधक ऊजाग युि महसूस करता है।

References

Published

2025-09-30