िहंदी संत परंपरा और रैदास

Authors

  • ोफे सर अलका पांडे हदं ी िवभाग, लखनऊ िवLिवxालय, लखनऊ Author

Keywords:

संत पर6पराए रैदास

Abstract

आधुिनक युग म  संत रैदास क िवचारधारा का अपना िविशग महथ्व है। लौिकक लिग सेए जब बड़े से लेकर छोटे तकए सब ाणी
कतख्य िवमुख हो रहे ह। । तब लोक परलोक क िनंदा तुित से दूरए अपनी सत सा-वी पथ्नी के साथ मामूली सी झोपड़ी म  बैठे ह,ए ए
जूता सीकर जीिवका चलाने वालेए भळ फकर और तत्रमय संत रैदास का कतख्य परायण होकर गृहथ जीवन ख्यतीत करते ह,ए
आथ्म उ7ार के िलएएभिळ पथ अपनाने का संदेश िकसे नर्ह मोह लेता । अक्ष्युदय से लेकरए िनष् द्येयस क ओर ले जाने वालीए
उनक वाणी सचमुच अनुकरणीय है । उनका लौिकक और आ-यािथ्मक िचंतन संसार के सभी दुख को दूर करने के िलए रामायण
के समान भावशाली औषिध हैए समाज के िलए भी और ख्यिळ के िलए भी।
तुत शोध प
 म  संत पर6परा के मुख संत रैदास के जीवन दशन एवं कृितथ्व का वणन िकया गया है

References

Published

2023-09-29