जेण् कृ7णमूित का शैिक अवदान
Keywords:
जे. कृ5णमूित-, मानव मूMय, िश1ा एवं समाजAbstract
िशरुा को मानवीय मूम्य के िवकास म एक महथ्वपूण एवं सशळ मा-यम माना जाता है। वतमान समय म िव5 सामािजकए
सांकृितकए आिथक और राजनैितक संकट के दुप्भाव से श्रत है। आज मनुप्य देशकालए जाितए स6दाय एवं अत्रय कार क
इकाईय म िवभािजत होकर अपने चारो ओर वैचा/रक मतभेद तथा वैमनयता क खाई चौड़ी करने म लगा है। ऐसी िथित म
मानवीय मूम्य क उपादेयता बढ़ जाती है। सभी िवचारक एवं दाशिनक ने जीवन क साथकता के िलए मानवीय मूम्य क
अिनवायता को वीकार िकया है। मानववादी िचत्रतक म एक मुख नाम आधुिनक भारतीय िचत्रतक एवं िवचारक जे0 कृप्णमूित
का है। मनुप्य का समश्र अत्रतर बात् फुटन जेण् कृप्णमूित के िशरुा के केत्रन् म है। इसी को -यान म रखकर उत्रहने ार6भ से ही
ब़च क स6यक एवं समश्र िशरुा पर िवशेष बल िदया। अपने वयं के जीवन म जो कुछ महसूस िकया वही अनुभव उनका
दाशिनक िचत्रतन बना। तुत शोध प
म जे0 कृप्णमूित के शैिरुक िचत्रतन स6बत्रधी िवचार पर काश डाला गया है जो
वतमान शैिरुक समयाओ ंके समाधान म अथ्यिधक उपयोगी एवं ासिं गक ह।ै