जेण् कृ7णमूित का शैिक अवदान

Authors

  • डॉण्ममता िसंह अिसट8ट:ोफेसरए बीण्एडण् िवभागए डीण्बीण्एसण्कालेजए कानपुर Author

Keywords:

जे. कृ5णमूित-, मानव मूMय, िश1ा एवं समाज

Abstract

िशरुा को मानवीय मूम्य के िवकास म  एक महथ्वपूण एवं सशळ मा-यम माना जाता है। वतमान समय म  िव5 सामािजकए
सांकृितकए आिथक और राजनैितक संकट के दुप्भाव से श्रत है। आज मनुप्य देशकालए जाितए स6दाय एवं अत्रय कार क
इकाईय म  िवभािजत होकर अपने चारो ओर वैचा/रक मतभेद तथा वैमनयता क खाई चौड़ी करने म  लगा है। ऐसी िथित म 
मानवीय मूम्य क उपादेयता बढ़ जाती है। सभी िवचारक एवं दाशिनक ने जीवन क साथकता के िलए मानवीय मूम्य क
अिनवायता को वीकार िकया है। मानववादी िचत्रतक म  एक मुख नाम आधुिनक भारतीय िचत्रतक एवं िवचारक जे0 कृप्णमूित
का है। मनुप्य का समश्र अत्रतर बात् फुटन जेण् कृप्णमूित के िशरुा के केत्रन् म  है। इसी को -यान म  रखकर उत्रहने ार6भ से ही
ब़च क स6यक एवं समश्र िशरुा पर िवशेष बल िदया। अपने वयं के जीवन म  जो कुछ महसूस िकया वही अनुभव उनका
दाशिनक िचत्रतन बना। तुत शोध प
 म  जे0 कृप्णमूित के शैिरुक िचत्रतन स6बत्रधी िवचार पर काश डाला गया है जो
वतमान शैिरुक समयाओ ंके समाधान म  अथ्यिधक उपयोगी एवं ासिं गक ह।ै

References

Published

2023-09-29