अमिगि सिंवियन िें आकलन की िूमिकारू चुनौमतर्ािं एविं सुझाव

Authors

  • मनमि रार् अशसस्टेंट प्रोफ़ेसरए शशक्षाशास्त्र शिभागए शदशग्िजय नाथ स्नातकोिर महाशिद्यालयए गोरखपुर Author

Keywords:

अमधगम संिधयन, अमधगम िातािरण, आकलन

Abstract

मशक्षण अमधगम प्रमक्रया का केंद्र मिंदु मशक्षाथी होता है। सम्पूणय अमधगम प्रमक्रया का उद्देश्य उसका उच्चतम मिकास होता है। चूंमक प्रत्येक मिद्याथी अमद्वतीय क्षमता धारक होता है अतः उसके मिकास का प्रथम चरण उसकी योग्यता एिं अंतः शमक्त को जानना है। इसके साथ ही उसकी योग्यता एिं अमधगम संप्रामप्त के िीच के अंतर को जानकर उसके अनुरूप मशक्षण प्रमक्रया को इस प्रकार आयोमजत करना है मजससे मशक्षाथी का अमधगम अमधकतम हो। इसके मलए उसके अमधगम का सतत् रूप से आकलन करते रहना आिश्यक है मजससे उसके अमधगम उद्देश्यों की प्रामप्त में आ रही िाधाओं को दूर करने की मदशा में सही समय पर साथयक प्रयास मकया जा सके। चूंमक हमारी ितयमान मशक्षा प्रणाली योगात्मक मूल्यांकन केमन्द्रत हैए अतः अमधगम संिधयन हेतु सतत् आकलन की मदशा में िहुत सारी चुनौमतयां हैं मजनके समाधान हेतु मनरंतर प्रयास की आिश्यकता है। प्रस्तुत शोध लेख उन चुनौमतयों एिं उनके समाधान हेतु सुझाि प्रस्तुत करता है।

References

Published

2024-09-30