रवीन्रनाथ ठाकुर की सािामजक मवचारिारा

Authors

  • िा0 रशश्म िीिास्ति एसोशसएट प्रोफेसरए बी0एि0 शिभागए मशहला शिद्यालय शिग्री कालेजए लखनऊ Author

Keywords:

व्यिस्थापनए रूमढ़गत एसहकाररताए ग्रामोन्नमतए रोजगारोन्मुख

Abstract

रमिंद्रनाथ ठाकुर ने समाज ि सामामजक व्यिस्थापन के सम्िन्ध में भी मदशा मनदेश मदये। समाज के दुियलए िंमचत ि मनधयन िगय के उत्थान के मलए उनकी संिेदनशीलता समय.समय पर मुखररत होती रही। रिीन्द्रनाथ ितयमान समय की सामामजक समस्याओं को अथयशास़्त्त्र ि उपयोमगतािाद के संकीणय दृमिकोण में नहीं देखते। इन सामामजक समस्याओं पर मिचार करने में िे अपने आध्यामत्मक दृमिकोण का उपयोग करते हुए उसे उच्चतम आदशय स्तर तक उठा देते हैं। सामामजक जीिन के व्यिमस्थतए प्रभािपूणय संयोजन और एक सुखी ि सम्पन्न समाज के मलए उन्होंने मशक्षा को भी िहुत महत्िपूणय माना। उनका मानना था मक मशक्षा ही िह सशक्त माध्यम है जो समाज को सभ्यए सुसंस्कृतए स्िस््य ि आमथयक रूप से आत्ममनभयर िनाने में मदद कर सकता है। यही कारण है मक शांमतमनकेतन जैसी संस्थान को स्थामपत कर उन्होंने हमारे सामने एक उत्कृि शैमक्षक संस्थान का आदशय प्रस्तुत मकया। शांमतमनकेतन के तमाम मिद्याथी ि मशक्षक सामामजक कायों में संलग्न रहे। उन्होंने तमाम समाजोपयोगी कायय भी मकये।

References

Published

2024-09-30