िारतीर् ज्ञान परम्परा एविं आचार्य

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  • िमि िेखर सहायक आचायि बी 0एि0 शिभाग शशिपशत पी0जी0 कॉलेजए शोहरतगढ़ए शसद्दाथिनगर Author

Keywords:

िैमदक सनातन ज्ञानए ज्ञान परम्पराए िैमदक आचाययए मशक्षा प्रणाली

Abstract

भारतीय संस्कृमत एिं ज्ञान का मूल आधार िेदए पुराणए उपमनषदए आरण्यक हैं। सम्पूणय िैमदक िांगमयए रामायणए महाभारतए स्मृमतग्रंथए दशयनए धमयग्रन्थए काव्यए नाटकए व्याकरण तथा ज्योमतष शास्त्र भारतीय ज्ञान परम्परा के अक्षय भण्डार हैं। जो भारतीय सभ्यताए संस्कृमत के प्रसार में सहायक मसि हुए हैं। िदलते सामामजक पररिेश और मूल्यों के िीच हमारी मशक्षा व्यिस्था को समािेशी िनाना अत्यािश्यक है। यह समािेशी व्यिस्था भारतीय प्राचीन ज्ञान परम्परा को मलये मिना नहीं चल सकते हैए ्योंमक एक तरफ तो हम आधुमनकता के दौर में सरपट भागे जा रहे हैंए िहीं दूसरी तरफ संस्कृमतए ज्ञानए मिज्ञान को भूलते जा रहे हैं। इस अंधानुकरण में हमारी मस्थमत कुछ ऐसी हो गयी है मक यमद दृमिहीन को रास्ता मदखाने िाला भी दृमिहीन हो तो लक्ष्य कैसे प्राप्त हो सकेगा। इस सम्प्रदाय के आलोक में नयी मशक्षा नीमत में िैमदक आचायों के िेष्ठ शारीररकए मानमसकए चाररमत्रक एिं नैमतक गुणों को समािेमशत करने हेतु मिशेष िल मदया गया है। इस मदशा में नयी पीढ़ी को िैमदक आचायों के अनुशासनात्मक नैमतक जीिन से जोडने के मलये ितयमान मशक्षा नीमत ने अमभनि पहल की है। इसके अन्तगयत भारतीय ज्ञान परम्परा के ऐसे सम्प्रत्ययों को जोडा गया है। मजससे आधुमनक आचायों में गौरििोध जागृत हो सके।

References

Published

2026-04-21