िारतीर् ज्ञान परिंपरा और र्ोग
Abstract
भारतीय ज्ञान परंपरा की जडें हजारो िषय पुरानी हैं। यह सनातन ज्ञान परम्परा मिश्व की समृि परंपराओं में से एक है। भारत की इसी समृि ज्ञान परंपरा ने संपूणय मिश्व को अनेक पिमतयोंए मसिान्तों एिं अमिष्कारों के माध्यम से सम्पूणय मिश्व का पथ.प्रदशयन मकया है। मजस ज्ञान तक आधुमनक मिज्ञान एक लंिी प्रमक्रया को पूणय करके अि प्राप्त कर पाया है िह ज्ञान हमारे ग्रन्थों में हजारों िषय पूिय ही िमणयत है। यह भारतीय ज्ञान परम्परा का महात्म्य है। इस समृि परंपरा के अंतगयत िेदए िेदांतए उपमनषद्ए पुराण एिं मिमभन्न दाशयमनक प्रणामलयाँ समम्ममलत हैए मजसमें योग का अमद्वतीय स्थान है। योग मसफय भारत में ही नहीं अमपतु मिदेशों में भी प्रययात हैं। योग ज्ञान की भाँमत मसफय िौमिक मिकास ही नहीं अमपतु शारीररक मिकास के साथ.साथ मनुष्य का आध्यामत्मक मिकास भी करता है। योग के माध्यम से मनुष्य अपने मनए शरीर और आत्मा में समन्िय मिकमसत करकेए उसे एकाग्र िनाता हैए मजससे िह अमधक ज्ञान अमजयत कर सकता है और जीिन के अंमतम लक्ष्य ;मोक्षद्ध को प्राप्त करता हैं। योग दशयन में मोक्ष को प्राप्त करने के मलए अिांग योग की िात कहीं गई है। इस शोध पत्र के अध्ययन हेतु सामहत्य समीक्षा और मिषयिस्तु मिश्लेषण मिमध का प्रयोग मकया गया है। प्रस्तुत शोध पत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल तत्ि ि योग की महिा का अध्ययन मकया गया है। इसके साथ ही योग की अिधारणाओए मसिांत और ितयमान समय में इसकी प्रासंमगकता का अध्ययन भी प्रस्तुत है।
मुख्य शब्द. भारतीय ज्ञान परम्पराए योगए अिांग योग।