ब्रज िें व्याप्त वैष्णव सम्प्रदायों की भशि िें रस-शसिांत व रसोपासना, राधावल्लभ सम्प्रदाय के शविेर् संदभभ िें
Keywords:
रस, सम्प्रदाय, प्रकिपादन, रसोपासना, कसद्दांि, दिणनकसद्द, रागानुगा, प्रेमोन्मुख, आकत्मि-िादात्म्य, रसमीमांसी, कनिुंज, आत्म-ज्ञान ।Abstract
यह िोध-पत्र ब्रज क्षेत्र में व्याप्त कवकभन्न वैष्ट्र्व सम्प्रदायों िी भकि परंपरा में कनकहि रस-कसद्दांि और रसोपासना िा कवश्लेषर् िरिा है, कजसमें कविेष ध्यान राधावल्िभ सम्प्रदाय पर िेंकद्रि किया गया है। ब्रज, जहाुँ राधा-िृष्ट्र् िी कदव्य िीिाएुँ संपन्न ह ईं, वहाुँ िी भकि िेवि धाकमणि अनुिीिन न होिर एि जीवंि रसात्मि अनुभव है, जो रस िो माध्यम बनािर भि और भगवान िे बीच परम आकत्मि संबंध स्र्थाकपि िरिी है। इस अध्ययन में वैष्ट्र्व सम्प्रदायों िी चचाण िरिे ह ए ब्रज िे कवकभन्न वैष्ट्र्व सम्प्रदायों िी रस परंपरा िा अध्ययन व कवश्लेषर् किया गया है। राधावल्िभ सम्प्रदाय िी रसोपासना कवकिि है, क्योंकि इसमें राधा िो गुरु, गुरु-मंत्र, अकधष्ठात्री-देवी व परम ित्त्व माना गया है। गोस्वामी श्रीकहि हररवंि महाप्रभु िारा प्रवकिणि यह सम्प्रदाय भकि िो एि भावप्रधान, संगीिमय और प्रेमरस से ओिप्रोि साधना-पर्थ मानिा है, कजसमें भि सहचरी-भाव से श्यामा-श्याम जू िो ररझािा है। यह िोध-पत्र दिाणिा है कि िैसे राधावल्िभ सम्प्रदाय िी भकि-धारा, रसोपासना िो िेवि सौंदयण या िाव्य नहीं, बकल्ि अकििीय आध्याकत्मि अनुभूकि िा मागण बनािी है, जो परमानंदमयी िीिाओं िे साक्षात्िार िी ओर िे जािी है।