कृत्रिम बुत्रिमत्ता के युग में त्रिक्षक की बदलती भूत्रमका

Authors

  • डॉ रत्रमम त्र िंह अत्र स्टेंट प्रोफे र, माजिास्त्र, मत्रहला महात्रिद्यालय, त्रकदिई नगर, कानपुर Author

DOI:

https://doi.org/10.67088/veethika/v16.i2.37

Keywords:

कृत्रिम बुत्रिमत्ता,, त्रिक्षक की भूत्रमका,, त्रित्रिर्ल त्रिक्षा, सामात्रिक पररवर्तन

Abstract

वर्तमान समय में कृत्रिम बुत्रिमत्ता के र्ीव्र त्रवकास ने त्रिक्षा प्रणाली को व्यापक रूप से प्रभात्रवर् त्रकया है, त्रिससे त्रिक्षक की पारंपररक भूत्रमका में महत्वपूणत पररवर्तन देखने को त्रमल रहा है। पहले िहााँ त्रिक्षक ज्ञान के मुख्य स्रोर् माने िार्े थे, वहीं आि वे एक मागतदितक, संयोिक और सह त्रिक्षाथी की भूत्रमका त्रनभा रहे हैं। एआई आधाररर् र्कनीकों िैसे स्मार्त लत्रनिंग प्लेर्फॉमत, वर्ुतअल क्लासरूम और व्यत्रिगर् त्रिक्षण त्रवद्यात्रथतयों को स्व त्रनदेत्रिर् अत्रधगम के अवसर प्रदान त्रकए हैं, त्रिससे त्रिक्षक की भूत्रमका केवल सूर्ना प्रदान करने र्क सीत्रमर् नहीं रह गई है। इस िोध का उद्देश्य कृत्रिम बुत्रिमत्ता युग में त्रिक्षक की बदलर्ी भूत्रमका का समाििास्त्रीय त्रवश्लेषण करना है। साथ ही, यह िोध त्रिक्षकों के सामने आने वाली र्ुनौत्रर्यों िैसे र्कनीकी दक्षर्ा की आवश्यकर्ा, रोिगार असुरक्षा र्था मानवीय संपकत में कमी का भी त्रवश्लेषण करेगा। त्रनष्कषत के रूप में हम कह सकर्े हैं त्रक एआई के युग में त्रिक्षक की भूत्रमका समाप्त नहीं हो रही है, बत्रकक वह अत्रधक सिि, बहुआयामी और छाि केंत्रिर् बनर्ी िा रही है, िो त्रिक्षा की गुणवत्ता और समावेत्रिर्ा को बढाने में सहायक है ।

References

Published

2026-06-25