ज्योशतशवभज्ञान का परम्परागत िहत्त्व

Authors

  • िॉ. राजेि कुिार शत्रपाठी अशसस्टेंट प्रोफेसर, दशिनशास्त्र शिभाग, हांसराज कॉलेज शदपली शिश्वशिद्यालय Author
  • िॉ. रशव कुिार गोंड़ अशसस्टेंट प्रोफेसर, शहांदी शिभाग, हांसराज कॉलेज शदपली शिश्वशिद्यालय Author

Keywords:

परम सत्ता, ग्रह, नक्षत्र, शिशर्थ, राशी, लग्न, महादशा, योग, पांचित्त्ि

Abstract

सम्पूर्ि प्रर्ाली एक पारलौशकक साििभौशमक शशि के शनयांत्रर् में है। शजसमें सब कुछ शाशमल है और इसके अलािा कुछ नहीं है। यह हमारे शिश्वास और भशि से सांबांशधि एक ऐसा मानदांड है। शजसमें सभी शिर्य शाशमल हैं। हमारी उत्पशत्त भी एक शनशिि स्र्थान और समय के अधीन है। जीिन की उत्पशत्त सृश???? है और शफर इसका शिलुि होना है। जब आत्मा ित्ि सिोच्च अशस्ित्ि में शिलीन हो जािा है, िो पाांच ित्िों से बना शरीर पाांच ित्िों में शिलीन हो जािा है। यहााँ शजज्ञासा उठिी है शक जब सिोच्च अशस्ित्ि सब कुछ है, िो हमारी शकस्मि और कमि कैसे शनधािररि होिे हैं? कुांडली के अनुसार, हम यह जानने की कोशशश करिे हैं शक 12 राशशयों या घरों के माध्यम से पररर्ाम कैसे शनधािररि होिा है। शकस्मि हमेशा भगिान द्वारा शनधािररि होिी है, जबशक हम स्ियां कमि करिे हैं। जो कमि हम स्ियां करिे हैं, िह कहीं न कहीं शकस्मि से सांबांशधि होिा है। और शजिनी शुद् शकसी की अांिरात्मा होिी है, भशिष्ट्यिाशर्यााँ उिनी ही सटीक होिी हैं, ज्योशिर् के माध्यम से भशिष्ट्य की शदशा, गशि और इसके पररर्ाम की गर्ना की जा सकिी है। ज्योशिर् के शिशभन्न शिशेर्ज्ञों ने अपनी भशिष्ट्यिाशर्यााँ दी हैं जो सच का एक मानदांड प्रस्िुि करिी हैं। शजससे हम सीधे समझ सकिे हैं शक एक ऐसा अनुशासन है जो हमारे पारांपररक ज्ञान के आधार पर एक शनशिि मानदांड के आधार पर िय होिा है। शजसे समझने या जानने के शलए एक पररष्ट्कृि रूप में प्रस्िुि करने की आिश्यकिा है।

References

Published

2025-03-31