गावो ववश्वस्य मातर

Authors

  • सन्दीप कुमार वमश्र सहायकाचायय,संस्कृत ििभाग, िकसान स्नातकोत्तर महाििद्यालय, बहराआच Author
  • शोभा शुक्ला ऄिस0 प्रोफेसर - संिहता , एन्क्राआट अयुिेिदक मेिडकल कालेज एण्ड हािस्िटल, लखनउ Author

DOI:

https://doi.org/10.67088/veethika/v16.i2.34

Keywords:

गो - संीकृित ,, सृिष्टचक्र में गो की ईपयोिगता,, देि की ििििध समृिि का हेतु एिं प्रासंिगकता।

Abstract

गो भारत की रािरिय समृिि और सम्पदा की ििििष्ट प्रतीक रही हैं। यह हमारी अर्ष परम्परा की महत्त्िपूर्ष ऄंग थी। ििसके तपोिन में गो - संकया िितनी िििा होती थी िह ईतना ही समृि समसा िाता था। भारतीय संीकृित की विष्ट से गो का
महत्त्ि तो गायत्री और गंगा से भी बढ़कर है। िेदों मे गो की मिहमा बड़े - बड़े सुथदर ैपकों तथा ईपमानो मे गायी गयी है। ऄथिषिेद
-मे कहा गया है‘ििश्वैपा धेनुः कामदुघा मेऽीतु’1 ऄथाषत् कमषफ के ैप में मुसे समीत फ देने िा ी एिं कामनाएँ पूर्ष करने िा ी धेनु प्राप्त हो। ििसका ऄथष हुअ िक ऄनािद का से ही गो हमारे ि ए पूिनीय एिं ऄिभनथदनीय रही है। भारतीय संीकृित कमष प्रधान है। यज्ञ भी कमष का ही एक ैप है। ििस प्रकार यज्ञचक्र गो के िबना सम्भि नहीं है ईसी प्रकार कमषचक्र को भी सुखद एिं ऄनुकू बनाने के ि ए गो की अिश्यकता है। श्रीमद्भगिद्गीता में सृिष्टचक्र को यज्ञ में ही प्रितिित बताते हुए कहा गया है-
‘तीमात्सिषगतं ब्रह्म िनत्यं यो प्रितिितम्’2। यज्ञ के िबना िीिन को सिषथा िनरथषक माना गया है। ििश्वकल्यार् का प्रमुख साधन यज्ञ है और गो ईस यज्ञ का मुकयतम ऄंग है। गो से प्राप्त होने िा ा पंचगव्य िितना ईपयोगी यज्ञ में है ईतनी ही मानि - िीिन में भी
- र ा का प्रच एक ििचारर्ीय प्रच ह।ै गो हमारी द ईसकी ईपयोिगता ह।ै अि गोृृिष्ट में केि पिु ही नही ऄिपतु पृथ्िी का भी प्रतीक है। महिर्ष याीक ने ऄपने िनघण्टु ग्रथथ का अरम्भ ‘गो’ िब्द से ही िकया है। गभाषधान संीकार से ेकर दाह - संीकार तक
िसा कोइ संीकार नहीं ििसमे गो की अिश्यकता न पड़ती हो। भारत ने गो की मिहमा अि से ही नहीं ऄिपतु ऄनािदका से समसा है। आस प्रकार यिद देखा िाय तो भारतीय संीकृित का मेरु गो - संीकृित ही है। आसीि ए िेदों , ईपिनर्दों पुरार्ों,रामायर् और महाभारत अिद सभी अर्षग्रथथों में सिषत्र गो की मिहमा का िििद् िर्षन िम ता है। प्रीतुत ेख में िेदों, पुरार्ों, अर्षकाव्यों अिद में ििर्षत गो मिहमा, तथा अधुिनक समय में ईसकी ईपयोिगता पर विष्ट डा ने का प्रयास िकया गया है।

Author Biographies

  • सन्दीप कुमार वमश्र, सहायकाचायय,संस्कृत ििभाग, िकसान स्नातकोत्तर महाििद्यालय, बहराआच


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  • शोभा शुक्ला, ऄिस0 प्रोफेसर - संिहता , एन्क्राआट अयुिेिदक मेिडकल कालेज एण्ड हािस्िटल, लखनउ


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References

Published

2026-06-25