राधावल्लभ सम्प्रदाय का भक्ति दर्शन और क्तसद्ाांत

Authors

  • कीरति बल्लभ देव पाठक सीतनयर ररसर्च फैलो (संगीि एवं सूक्ष्म कला संकाय, तदल्ली तवश्वतवद्यालय) Author

DOI:

https://doi.org/10.67088/veethika/v16.i2.33

Keywords:

राध्िाल्लभ,, भक्ति दिशन

Abstract

सम्प्रदाय भारतीय भक्ति परम्प्परा की एक क्तिक्तिष्ट िाखा है, क्तिसकी स्थापना गोस्िामी श्रीक्तहत हररिंि महारभु िी द्वारा ब्रि में की गई। यह सम्प्रदाय श्रीराधा को परम आराध्य रूप में रक्ततक्तित करता है। श्यामा श्याम िू की रसोपासना के माध्यम से क्तनत्य अष्टययाम सेिा करना ि उनकी क्तनत्य क्तिहार लीलों का दिशन कर उच्चतम आध्याक्तत्मक अनुभूक्तत करना ही इस सम्प्रदाय के रक्तसकिन का उद्देश्य है । यह सम्प्रदाय िेद, उपक्तनषद, भागिताक्तद ग्रन्थों का आधार लेकर भी अपनी क्तिक्तिष्टता में अनन्यता रखता है। राधािल्लभ सम्प्रदाय ने भक्ति को केिल उपासना नहीं, अक्तपतु एक रसात्मक आध्याक्तत्मक यात्रा के रूप में क्तिकक्तसत क्तकया है। राधािल्लभीय परम्प्परा के संदभश में ब्रि के िैष्णि भारतीय संगीत और साक्तहत्य की उस परंपरा के संिाहक हैं, िहााँ भक्ति, काव्य और दिशन परस्पर क्तिलीन हो िाते हैं। इस सम्प्रदाय का भक्ति दिशन न केिल आध्याक्तत्मक साधना का साधन है, अक्तपतु सौंदयशबोध की चरम अक्तभव्यक्ति भी है। गोस्िामी श्रीक्तहत हररिंि महारभु ने अपने भक्ति दिशन के माध्यम से न केिल राधािल्लभ सम्प्रदाय की स्थापना की बक्तल्क िैष्णि भक्ति के रक्तत अपने अक्तद्वतीय दृक्तष्टकोण से भारतीय भक्ति दिशन, आध्यत्म, संगीत और साक्तहत्य को एक नई क्तदिा दी। उनके काव्य में कृष्ण और राधा के रेम का िो गूढ़ रूप रस्तुत क्तकया गया, िह आि भी भिों के हृदय में गूंिता है और िैष्णि भक्ति परंपरा के अमूल्य रत्न के रूप में रस्तुत क्तकया िाता है। यह िोध पत्र भक्ति दिशन के धरातल पर सम्प्रदाय के धाक्तमशक, दािशक्तनक एिं सांस्कृक्ततक स्िरूप का क्तिश्लेषण करता है, साथ ही इसके रमुख क्तसद्ांतों, ग्रंथों एिं साधना पद्क्ततयों की गहन समीक्षा करता है। िोध का उद्देश्य इस सम्प्रदाय की साक्तहक्तत्यक ि सांगीक्ततक क्तिक्तिष्टतांं को उिागर कर भक्ति परम्प्परा में इसके योगदान को रेखांक्तकत करना है।

References

Published

2026-06-25