उर्दू में भगवान राम

Authors

  • सय्यद मुबीन ज़ेहरा एसोससएट प्रोफेसर, इसिहास सिभाग, ए.आर.एस.डी. कॉलेज, सदल्ली सिश्वसिद्यालय । Author

DOI:

https://doi.org/10.67088/veethika/v16.i2.32

Keywords:

रयम, कृष्ण,, उदूा,, रयमययण, रयमचररत मयनस, मुकस्लम, शायर

Abstract

मययादय पुरषोत्तम श्री रयम भयरत की पहचयन हैं. ऐसय नहीं है कक भयरत में केवल कहिंदू ही उन्हें मयनते हों. श्री रयम जी की पूजय अचानय को लेकर कजस प्रकयर कहन्दू उन्हें अपनयते हैं दुसरे धमों में चयहे उनको उस प्रकयर पूजय न जयतय हो लेककन उनकय व्यकिव, उनकी किक्षय, उनकी जीवणी तथय उनकय जीवन दिान सभी धमों के मयनने वयलों को सदय प्रभयकवत करतय आयय है. कहन्दू धमा से सम्बिंकधत जो पुस्तकें उदूा में सवयाकधक प्रकयकित हुई हैं उन में रयमययण और भगवद्गीतय सब से ऊपर हैं. कजस प्रकयर कहन्दू ककव यय लेखक मुहम्मद सयहब, हज़रत अली, हज़रत इमयम हुसैन, और दुसरे मुकस्लम सूफ़ी सिंतों पर कलखते रहे हैं वैसे ही कहन्दू देवी देवतयओिं पर कलखने वयले मुकस्लम कवद्वयनों, ककवयों और लेखकों की भी कमी नहीं है. अकबर के समय में पुस्तकों के अनुवयद के कलए एक सिंस्थय “दयरुल तजुामय” के द्वयरय बयल्मीकक रयमययण और तुलसी रयमययण के अनुवयद ककए गए थे। अब्दुल क़यकदर बदययूिंनी की “मुन्तख़यबुल तवयरीख़” में इस प्रकयर के कई अनुवयदों की चचया की गई है। जहयिंगीर के समय में भी ऐसे कुछ अनुवयद हुए थे कजन में सयदुल्लयह मसीह की कलखी “रयमययणे मसीही” भी ियकमल है. इस िोधपत्र में उदूा में रयमययण के कवकभन्न ग्रिंथों पर चचया की गयी है.

References

Published

2026-06-25