प्रागैतिहातसक मानव की बौतिकिा एवं सृजनशीलिा : तशल्प कला के तवशेष संदर्भ में
DOI:
https://doi.org/10.67088/veethika/v16.i2.31Keywords:
लकडी ,, पाषाण,, हड्तडयााँ,, मृदभांड , शैल तचत्र ।Abstract
प्रागैतिहातसक काल में मानव प्राकृतिक पयाावरण में तनवास करिा था और प्रकृति से प्राप्त चीज़ों का प्रयोग अपने जीवन-यापन के तलए करिा रहा होगा ।तजसके अंिगाि प्रकृति में सुलभिा से प्राप्त लकडी व प्रस्िर का प्रयोग ( प्रारंतभक स्िर पर अपनी सुरक्षा व आखेट के रूप में ) करिा था। तजनमें प्रस्िर अवशेष, प्रागैतिहातसक जीवाश्म अवशेष़ों के साथ प्राप्त हुए है । तजनमें प्रारंतभक तशल्प कला के स्वरूप की झलक देखी जा सकिी है प्रागैतिहातसक काल की िीन चरण़ों - पूवापाषाण काल , मध्यपाषाण काल और नवपाषाण काल के तवभाजन में मानव द्वारा की गई प्रस्िर कारी सहायक रही। पूवापाषाण काल के दौरान मानव द्वारा बनाये प्रस्िर तशल्प के उपकरण जैसे - खंदक (chopper-chopping tool), हस्ि कुठार (Hand Axe), तवदारणी (Cleaver) , खुरचनी (Scraper), वेधक (Borer), और नोक वाले अग्रक (point) , फलक (Blades) और िक्षणी (Burins) आतद, साथ ही हड्तडय़ों, जानवऱों की तसंग़ों व हाथी दााँि के बने उपकरण़ों के माध्यम से तशल्प कला के तवकास की तनरंिरिा को देखा जािा सकिा है । मध्य पाषाण काल व नव पाषाण में भी उपयुाक्त तवशेषिाओं के साथ-साथ काष्ठ तशल्प, मृदभांड तशल्प, वस्त्र तशल्प की जानकारी प्राप्त होिी है।साथ ही, उस समय के प्राप्त शैल -तचत्र ित्कालीन मानव की सृजन क्षमिा व बौतिकिा के साथ तशल्प के स्वरूप को बिाने में सहायक रहे। प्रस्िुि शोध सारांश द्वारा, शोध-पत्र में इन्हीं िथ्य़ों का सतवस्िार तवश्लेषण प्रस्िातवि तकया जाएगा ।