गणितीय ण िंता सम्बन्धी णिक्षकों और णिद्याणथियों के णिए निोन्मेषी णिक्षि रिनीणतयााँ : एक दस्तािेज़ी णिश्लेषि
DOI:
https://doi.org/10.67088/veethika/v16.i2.30Keywords:
गवणर्ीय व िंर्ा,, नवोन्मेषी विक्षण रणनीवर्यािं र्था र्ावकतक व न्र्न lAbstract
वर्तमान समय में ववद्यावथतयों को पथभ्रवमर् करने वाले अनेक ववषय घेरे रहर्े है, जो उनके मवतर्ष्क में व िंर्ा को उत्पन्न कर उनके बौविक ववकास को अवरुद्द करर्े हैं l बौविक ववकास के अवरुद्द होने के कारण उनके र्ावकतक व िंर्न पर भी प्रभाव पड़ रहा है l र्ावकतक ववषयों के अिंर्गतर् गवणर् ववषय का एक महत्त्वपूणत तथान है l गवणर् ववषय में उपवतथर् र्थ्य को र्कत के आधार पर वसि करने का प्रयास वकया जार्ा है l ववद्यावथतयों के सम्मुख जब कोई गवणर्ीय समतया प्रतर्ुर् की जार्ी है र्ो ववद्यावथतयों में र्ावकतक वव ार जन्म लेने लगर्े हैं l जब यह वव ार गवणर्ीय समतया को हल नहीं कर पार्े र्था अन्य नकारात्मक वव ार उस पर हावी होने लगर्े है र्ो ववद्यावथतयों में भय, र्नाव और व िंर्ा उत्पन्न होने लगर्ी हैं l यह व िंर्ा एक ववद्याथी के मन मवतर्ष्क में पह ुँ कर उसकी गवणर्ीय उपलवधध को प्रभाववर् करने लगर्ी है र्ो इस र्रह की व िंर्ा को गवणर्ीय व िंर्ा कहर्े है l वर्तमान युग अनुसन्धान का युग है, वजसमे अनेक प्रकार की विक्षण रणनीवर्यों का उदय ह आ है, वजन्हें उपयोग में लाकर एक गवणर् विक्षक, ववद्यावथतयों की गवणर् सम्बिंवधर् समतयाओिं को दूर करने का प्रयत्न करर्ा है l ववद्याथी तवयिं भी इन समतयाओिं के समाधान करने के वलए अनेक प्रकार की रणनीवर्यों का प्रयोग करर्े हैं l प्रतर्ुर् िोध पत्र में गवणर्ीय व िंर्ा को दूर करने में विक्षकों एविं ववद्यावथतयों की नवोन्मेषी विक्षण रणनीवर्यों को तपष्ट वकया गया है l