आधुननक मनोनिज्ञान में भारतीय योगदान: एक दृश्यािलोकन
DOI:
https://doi.org/10.67088/veethika/v16.i2.28Keywords:
भारतीय मनोविज्ञान,, चेतना,, योग, स्िदेशी मनोविज्ञान, मानवसक स्िास््य ।Abstract
मनोविज्ञान को सामान्यतः पविमी िैज्ञावनक परंपरा की देन माना जाता है, वकंतु मन, चेतना, अत्मा तथा व्यिहार संबंधी वचंतन भारत में ऄत्यंत प्राचीन है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य अधुवनक मनोविज्ञान में भारतीय योगदान का ऐवतहावसक तथा दाशशवनक विश्लेषण करना है। साथ ही मानवसक स्िास््य की प्रावि हेतु भारतीय मनोिैज्ञावनक उपाय का ऄध्ययन भी करना है। ऄध्ययन में िैवदक एिं उपवनषवदक सावहत्य, गीता, योगदशशन तथा अधुवनक भारतीय मनोिैज्ञावनकों के योगदान का परीक्षण वकया गया है। शोध में यह प्रवतपावदत वकया गया है वक भारतीय मनोविज्ञान समग्र, सांस्कृवतक एिं अध्यावत्मक दृविकोण प्रस्तुत करता है, जो अधुवनक िैविक मनोविज्ञान को संतुवित और मानिीय अयाम प्रदान करता है। प्रस्तुत शोध के ऄध्ययन हेतु गुणात्मक एिं विश्लेषणात्मक विवध का प्रयोग वकया गया है। प्रदत्त संकिन हेतु वितीयक स्रोतों का उपयोग वकया गया है।