भारतीय ज्ञान परम्परा िें योग की अवधारणा और शवकास

Authors

  • पूजा देवी शोध छात्रा, योग शिज्ञान शिभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय सांस्कृि शिश्वशिद्यालय, नई शदपली Author
  • िॉ. शववेक शिश्र पीएचडी, राजनीशि शिज्ञान, डॉ. राममनोहर लोशहया अिध शिश्वशिद्यालय, अयोध्या Author

Keywords:

आसन, प्रार्ायाम,योग, िैशश्वक जगि, अध्यात्म।

Abstract

योग एक ऐसा अभ्यास है जो व्यशियों को स्ियां से जुड़ने और अपने आस-पास की दुशनया को गहराई से समझने में मदद करिा है। योग के अभ्यास के माध्यम से, व्यशि मन की शाांशि, स्प????िा और आध्याशत्मक जागृशि की भािना प्राि कर सकिे हैं। योग की कालािीि शशक्षाएाँ व्यशियों को आत्म-खोज और ज्ञानोदय की ओर उनकी यात्रा पर प्रेररि और मागिदशिन करिी रहिी हैं। इस शोध पत्र के माध्यम से योग की उत्पशत्त और शिकास की यात्रा को शिस्िार से सन्दशभिि शकया गया है। शजसमें दशिन के माध्यम से योग के आध्याशत्मक पक्ष पर भी ध्यान आकृ???? शकया गया है। आसन, प्रार्ायाम और ध्यान के माध्यम से शकस प्रकार अभ्यास करके भौशिक जगि की समस्याओां से शनिृत्त ह आ जा सकिा है? सार्थ ही कैसे आज भारिीय योग िैशश्वक स्िर पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो सका? इन सभी प्रश्नों के उत्तर इस शोध पत्र में देने का प्रयास शकया गया है।

References

Published

2025-03-31