भारतीय ज्ञान परंपरा तथा प्रततयोगी तिद्याथी
Keywords:
भारतीय ज्ञान, परंपरा ,प्रद्धतयोगीता, प्रद्धतयोगी द्धवद्याथीAbstract
भारतीय ज्ञान परंपरा जो हजारों वर्ष पुरानी है। भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी प्राचीन बौद्धिक ज्ञान को समाद्धहत द्धकए हुए हैं । वतषमान समय में भारतीय ज्ञान , द्धवश्व के समस्त ज्ञान की केंद्र द्धबंदु है। वतषमान समय में द्धजस भी प्रकार के अनुसंधान कायष हो रहे हैं या होने वाले हैं उन सब का प्रयोग भारतीय ज्ञान परंपरा में पहले ही हो चुका है। वेद , उपद्धनर्द , वेदांग , पुराण और भागवत गीता के रूप में भारतीय ज्ञान का आधार मूलभूत मानवीय समस्याओं से द्धनपटना है तथा आधुद्धनक युग में हमारे सामने आने वाले लगभग हर प्रकार की समस्याओं का समाधान हमारे प्राचीन भारतीय ज्ञान में समाद्धहत है । भारतीय दृद्धिकोण से ही ज्ञान परंपरा का अध्ययन कर हम भारतीय एक बार द्धिर द्धवश्व गुरु बन सकते हैं । सुभाद्धर्त संग्रह में ज्ञान के द्धलए कहा गया है द्धक ज्ञान मनुष्य का तीसरा नेत्र है जो उसे समस्त तत्वों के मूल को समझने की क्षमता प्रदान करता है। भारतीय ज्ञान प्रणाली में ज्ञान ,द्धवज्ञान ,जीवन दर्षन तथा अन्य अनद्धगनत क्षेत्र र्ाद्धमल है ।
ज्ञान के क्षेत्र में भारत द्धवश्व गुरु होने के साथ-साथ वतषमान समय के द्धवद्याद्धथषयों के मानद्धसक तथा र्ारीररक समस्याओं का द्धनदान भी रखता है।आज वैज्ञाद्धनक युग के तीव्र गद्धत में एक समय में जीवन में अद्धधक से अद्धधक सिल होने की चाह के कारण जीवन के हर क्षेत्र में प्रद्धतस्पधाष या प्रद्धतयोद्धगता की होड़ र्ाद्धमल हो चुकी है। द्धकसी भी द्धवद्याथी को अपने आप को काद्धबल साद्धबत करने के द्धलए इन प्रद्धतस्पधाषत्मक परीक्षाओं को पास करना पड़ता है द्धजसके बाद ही द्धवद्याद्धथषयों को उनके जीवन के मनचाहे क्षेत्र में प्रवेर् द्धमलता है। लेद्धकन द्धवद्याद्धथषयों को प्रद्धतस्पधाषत्मक परीक्षाओं को पास करने के द्धलए अनद्धगनत समस्याओं का सामना करना पड़ता है । कभी-कभी ये प्रद्धतयोगी द्धवद्याथी मानद्धसक रूप से इतने तनावग्रस्त हो जाते है द्धक वह अपने जीवन को बोझ समझने लगते है तथा वह इस दुलषभ मानव जीवन से द्धनरार् होकर आत्महत्या जैसी जघन्य अपराध कर बैठते है।लेद्धकन हमारे भारतीय ज्ञान परंपरा में द्धवद्याद्धथषयों की समस्याओं का द्धनदान भी समाद्धहत है। भारतीय ज्ञान परंपरा जो जीवन जीने की कला द्धसखाती है । ज्ञान तथा द्धवज्ञान के साथ-साथ जीवन जीने की कला भी भारतीय ज्ञान परंपरा में ही समाद्धहत है । योग को अपने दैद्धनक जीवन में र्ाद्धमल करके उच्च स्वास््य , तनाव मुक्त जीवन , मानद्धसक स्वास््य हमारे भारतीय ज्ञान परंपरा की देन है । पूरा द्धवश्व इस ज्ञान के सागर का स्वाद लेने के द्धलए आतुर है । द्धवद्याथी जो भावी राष्र के नागररक हैं उनको भारतीय ज्ञान और संस्कृद्धत का अनुभव होना अत्यंत आवश्यक है । इसको आगे बढाने के द्धलए ही हमारी राष्रीय नीद्धत 2020 भारतीय ज्ञान को द्धवद्यालय, महाद्धवद्यालय तथा द्धवश्वद्धवद्यालय के पाठ्यचयाष में र्ाद्धमल कर द्धवद्याद्धथषयों को लाभाद्धन्वत करने का भर्षक प्रयास कर रही है ।