उच्च प्राथशिक स्तर पर ऑनलाइन कक्षाओं के प्रशत िहरी व ग्रािीण क्षेत्र के शवद्याशथभयों की अशभवृशि का अध्ययन
Keywords:
शशक्षा, ऑनलाइन कक्षाएां, अशभिृशत्तAbstract
शशक्षा मानि का मौशलक अशधकार है। शकसी भी राष्ट्र के सांपन्निा िर्था प्रगशि उस राष्ट्र की गुर्ित्तापूर्ि शशक्षा पर शनभिर करिी है। यह शशक्षा गुर्ित्तापूर्ि िभी हो सकिी है जब उसके द्वारा प्रशिभाशाली एिां योग्य शिद्याशर्थियों को उत्पन्न शकया जाए | यही प्रशिभासांपन्न शिद्यार्थी अपने राष्ट्र को प्रगशि के पर्थ पर अग्रसर कर सकिे हैं। प्रशिभासांपन्निा शिद्याशर्थियों के सिाांगीर् शिकास से ही सांभि है। इनके सिाांगीर् शिकास के शलए अब केिल शिद्यालय ही उपलब्ध नहीं है िरन अनेक नये माध्यमों ने जन्म शलया है| निीन माध्यमों की प्रगशि चल ही रही र्थी शक कोरोना की शिर्म पररशस्र्थशि ने इन माध्यमों की गशि को और बढ़ा शदया। इससे ऑनलाइन कक्षाओां को शिश्व पटल पर लाकर खड़ा कर शदया जो शशक्षा शिद्यालय की चहारदीिारी के भीिर दी जािी र्थी, अब उसका दायरा इन ऑनलाइन कक्षाओां ने बढ़ा शदया है । इस गशि ने निीन ऑनलाइन कक्षाओां में शिद्यार्थी उपयुि ढांग से निीन ज्ञान सीख सकें, अनुभिों से लाभ उठा सकें, शिशभन्न पररशस्र्थशियों में प्रत्ययों, सांकेिों आशद को प्रभािपूर्ि ढांग से प्रयोग कर सकें। ये सभी िथ्य काफी हद िक शिद्याशर्थियों के बुशद्, िािािरर् एिां अशभिृशत्त पर शनभिर करिा है। समस्ि शशक्षा व्यिस्र्था का शनयोजन िर्था शक्रयान्ियन शिद्याशर्थियों की मानशसक योग्यिा ि अशभिृशत्त के अनुरूप भी शकया जाना चाशहए। िभी िे अपने अभी???? लक्ष्य को प्राि कर पाएांगे। प्रस्िुि शोध पत्र इन्हीं शबांदुओां पर केंशिि है। उच्च प्रार्थशमक स्िर के ग्रामीर् ि शहरी क्षेत्र में शिद्याशर्थियों के िर्िनात्मक अनुसांधान के सिेक्षर् शिशध से प्राि प्रदत्तों के मात्रात्मक शिश्लेर्र् के माध्यम से यह शोध 0.05 सार्थिकिा स्िर पर प्रस्िुि शोध की सार्थिकिा की जाांच करिा है, शजसमें शहरी क्षेत्र के छात्र- छात्राओां में ऑनलाइन कक्षा के प्रशि अशभिृशत्त में कोई सार्थिक अांिर नहीं पाया गया है। ऑनलाइन शशक्षर् के शलए उपलब्ध शिशभन्न िकनीकों का प्रयोग करके शशक्षक िास्िशिक समय, समकाशलक िीशडयो कॉन्फ्रेंशसांग प्रदान करके एक परस्पर दूरस्र्थ शशक्षा अनुभि प्रदान कर सकिे हैं।