बौद्ध धर्म के विकास में स्त्रियों का योगदान
Keywords:
महाप्रजापति गौतमी, यशोधरा, महिषी विशाखा, धम्मदिन्ना, संघमित्राAbstract
छठी शताब्दी ईसा पूर्व जिन धर्मों का प्रादुर्भाव हुआ उनमें बौद्व धर्म काफी तेजी से पुष्पित, पल्लवित हुआ और उसने थोड़े ही समय में न सिर्फ भारत वरन् भारत के बाहर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। बौद्व धर्म के इतनी शीघ्र विकसित होने के कई कारण थे। धर्म को प्रचारित प्रसारित करने में बौद्व संघ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। बौद्व धर्म के विकास में बौद्व भिक्षुओं का तो अपूर्व योगदान रहा ही किन्तु भिक्षुणियों के प्रयासों एवं सहयोग को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। संघ की भिक्षुणियों ने भी धर्म के विकास में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। बौद्व उपासिकाओं ने भी गृहस्थ धर्म के पालन के साथ बौद्व धर्म के साथ न्याय करते हुए धर्म के विकास हेतु महत्वपूर्ण कार्य किए। वस्तुतः तत्कालीन विषम परिस्थितियों में स्त्रियों का संघ में सम्मिलित होना एवं धर्म प्रचारार्थ कार्य करना निश्चय ही सराहनीय था।