कुषाण कालीन मथुरा कला में ब्राह्मण देवियाँ
Keywords:
कुषाण कला, मथुरा, देवी, ब्राह्मण देवियाँAbstract
‘देवी’ के रूप में स्त्री की पूजा की परम्परा भारत सहित विश्व के लगभग सभी देशों में आदिकाल से रही है। भारतीय सभ्यता के आरंम्भ से ऐतिहासिक काल के विभिन्न युगों में देवी मूर्तियों का निर्माण मूर्तिकला तथा प्रतिमा विज्ञान दोनों ही दृष्टियों से विशिष्ट स्थान रखता है। कुषाणकाल भारतीय इतिहास एवं संस्कृति का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण काल है। आर्थिक समृद्धि के कारण सांस्कृतिक विकास के नवीन द्वार खुले तथा कला को विकसित होने का भरपूर अवसर मिला। तत्कालीन कला के दो प्रमुख केन्द्रों मथुरा एवं गांधार में विभिन्न धर्मों से संबंधित मूर्तियों का निर्माण हुआ और लौकिक जीवन के विविध पक्षों का भी हृदय से रूपांकन किया गया। कुषाण शासक धर्म सहिष्णु थे अतः सभी धर्मों को विकसित होने का सुअवसर मिला। बौद्ध धर्म की महायान शाखा से संबंधित मूर्तियों के अतिरिक्त बाह्मण धर्म की मूर्तियों का भी भरपूर अंकन किया गया जिसमें विभिन्न देवियों की मूर्तियों का निर्माण उनकी संवेदनशीलता और रचनात्मकता का परिचय देता है। प्रस्तुत शोधपत्र में कुषाण काल के प्रसिद्ध कला केन्द्र मथुरा में निर्मित बाह्मण देवियों की मूर्तियों को एकत्रित करने का प्रयास किया गया है।