विकलांगों के लिए सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों के योगदान का समाजशास्त्रीय विश्लेषण
Keywords:
विकलांगता, सरकारी संगठन, गैर सरकारी संगठन ।Abstract
जनगणना (2011) के अनुसार भारत के कुल 64
प्रतिशत विकलांग व्यक्ति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अपना कोई योगदान नहीं देते हैं अथवा कहा जा सकता है कि उन्हें योगदान का अवसर प्रदान ही नही किया जाता है, जबकि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन स्तरों के मूल मानकों को प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार है। प्रकृति में इस तरह की धारणा को संरक्षक सिद्धांत के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि प्रकृति कभी भी अपनी नीति निष्क्रियताओं को उचित नही ठहराती है तथा सभी के साथ समान नियमों का पालन करती है। कुछ प्रकृतिशास्त्री मानते हैं कि मानव समाज के नियमों का उद्भव प्राकृतिक नियमों के आधार पर ही हुआ है। फिर भी, हमारी मान्यताएँ और विचारधाराएँ विकलांग लोगों के लिए भिन्न क्यों हैं? क्यों हम उनके जीवन की कठिनाइयों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होतें हैं? इन प्रश्नों का उत्तर प्रकृति के पास भी नही है। शायद यह मानव प्रकृति ही है कि हम केवल उन पर ही ध्यान केन्द्रित करते हैं, जिन्हें हम आसानी से समझ सकते हैं।