उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की कुरीतियों का अध्ययन

Authors

  • डॉ. सरोज राय सहायक आचार्या, शिक्षा विभाग, जैन विश्वभारती संस्थान, लाडनूं-राजस्थान Author

Abstract

शिक्षा सभ्य सुसंस्कृत एवं प्रगतिशील मानव समाज के लिए एक आधारशिला का निर्माण करती है। शिक्षा ही वह साधन है जो मनुष्य और जानवर या अन्य प्राणियों में अन्तर करती है, शिक्षा ही वह ज्योति पुंज है जो मानव के मस्तिष्क के अंधकार को दूर करके ज्ञान रूपी प्रकाश आलोकित करती है। शिक्षा हमारी समस्याओं को सुलझाकर सुसंस्कृत बनाती है। वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक चारित्रिक एवं सांस्कृतिक विकास करना है, विद्यालय इन समस्त उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक होता है, जिसके फलस्वरूप राष्ट्र के योग्य नागरिकों का निर्माण होता है। वर्तमान युग के प्रतिस्पर्द्धात्मक युग में शिक्षा चहुंमुखी विकास कर रही है। 1986 शिक्षा नीति, संशोधित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1992 शिक्षा के द्वारा लिए अनेक कारगर कदम उठाये गये हैं कि शिक्षा में सुधार हो सके। 2020 नई शिक्षा नीति भी वर्तमान भारत सरकार ने लागू कर दी है फिर भी अनेक कुरीतियां विद्यार्थी के विकास में कहीं न कहीं बाधा उपस्थित कर ही देती है। चाहे वह विद्यार्थी किसी भी वर्ग का क्यों न हो।

इस प्रकार वैज्ञानिक ज्ञान तथा तकनीकी विस्तार के फलस्वरूप विद्यार्थी अनेक ऐसी गलत धारणाओं का शिकार हो रहा है जिससे विद्यार्थी मानसिक रूप से ही भ्रमित नहीं हो रहा है बल्कि उसका शैक्षिक, सामाजिक विकास का मार्ग भी बाधित हो रहा है।

References

Published

2019-09-29