शिक्षा में आई.सी.टी. के नवाचार

Authors

  • मनीष मिश्र असिस्टेंट प्रोफेसर, शिक्षाशास्त्र विभाग, श्री जय नारायण मिश्र पी.जी. कॉलेज लखनऊ। Author

Keywords:

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Abstract

21वीं सदी को तकनीकी एवं ज्ञान की सदी कहा जाता है। जहां ज्ञान के सृजन, संचयन और पुनर्निर्माण में तकनीकी मुख्य भूमिका निभा रही है। तकनीक ने न केवल ज्ञान के सृजन में सहायता की है अपितु प्रशासन और मूल्यांकन में भी मानवीय मस्तिष्क की सहायता की है। यह बात कोविड-19 के काल में पूर्णतः सिद्ध हो जाती है कि कोई भी आपदा सभी वस्तुओं का उत्पादन तो रोक सकती है परंतु ज्ञान के उत्पादन, प्रशासन व संचयन को नहीं रोका जा सकता है। सन 2015 से ही भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया फ्लैगशिप प्रोग्राम को प्रारंभ करते हुए आईसीटी के महत्व को समझ लिया था, इसी कारण से इस दौरान शिक्षक, विद्यार्थी और पाठ्यक्रम के साथ शैक्षिक प्रशासन को भी चुस्त-दुरुस्त रखने वाली नई योजनाओं का निर्माण हुआ है। वस्तुतः आज आईसीटी शिक्षा की मुख्य नियामक बन चुकी है। आईसीटी ने जहां शिक्षा के मार्ग को सुगम बनाया है बल्कि समानता और न्याय जैसे जनमानस के मौलिक अधिकारों को समतल स्थान प्रदान किया है। प्रस्तुत शोध पत्र सूचना एवं संचार तकनीकी के विभिन्न माध्यमों एवं सरकार द्वारा चलाई जा रही तकनीकी सहायक योजनाओं का यथार्थ के धरातल पर विश्लेषणात्मक रूप से परिचय कराने का प्रयास है।

References

Published

2019-09-29