मनुष्य सृष्टि का आदि स्थान मनुष्ुष्य ृिऔरैर वर्णाश्र्रश्रमबन्ध
Keywords:
मनुष्य सृष्टि, वर्णाश्रमबन्धAbstract
भारतीय मनीषियों की रुचि प्रायः अध्यात्म यथा लोक-परलोक, ब्रह्म, जीवात्मा,जगत् आदि दार्शनिक विषयों के अध्ययन की ओर अधिक रही है, ऐसी अवधारणा पाश्चात्य विद्वानों की भारतीय विद्वानों के प्रति प्राचीन काल से ही रही है। इतिहास जैसे विषय की ओर उन्होनें कोई ध्यान नहीं दिया किन्तु उनकी यह अवधारणा उस समय तक थी जब तक वे भारतीय वांग्मय से अनभिज्ञ थे। वेद, स्मृति, गीता, पुराण, नीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र आदि प्रौढ़ ग्रन्थों के अध्ययन के पश्चात् उन्होनें भारतीय ऐतिहासिक चिन्तन को भी अद्वितीय स्वीकार किया है। प्रस्तुत शोधपत्र में मानवसृष्टि का आदिस्थान भारतद्वीप, पूर्णावयव मानव की उत्पŸिा,वर्णाश्रम श्रृखला का अनादित्व आदि के विवेचन के साथ-साथ मनुष्य के अधोगति को रोकने के लिए भगवान मनु द्वारा वर्णाश्रमबन्ध की स्थापना, उसके अनादित्व, औपनिषदिक दृश्य आदि पर सम्यक् प्रकाश डाला गया है।