सस्ंस्कृतृत वाड्.मय - सर्वर्जजन हिताय

Authors

  • ज्योेिति त्रिपाठी असिसटेन्ट प्रोफेसर, संस्कृत विभाग महिला पी0जी0 कालेज, बहराइच। Author

Keywords:

अवसाद ग्रस्त, अर्थकरी विद्या, उपचारात्मक एवं निदानात्मक, द्विगुणित क्रम, यूरोपीय विज्ञान

Abstract

आज मानव समाज की विक्षिप्त अवस्था में संस्कृत भाषा एवं साहित्य को एक औषधि के रूप में देखा जा सकता है। आज का युवा इस भ्रम जाल में पड़ा है कि वर्तमान समय में यह भाषा औचित्य हीन है तथा
 नवीन ज्ञान के अभाव में, वैज्ञानिकता से रहित हो अर्थकारी नही हो सकती। ऐसे में आवश्यकता इस भाषा की वैज्ञानिकता एवं ज्ञान भण्डार को सिद्ध करने की हो जाती है जो वास्तव में इसका मूल आधार है। सर्वप्रथम सर विलियम जोन्स ने इस भाषा एवं साहित्य के खजाने को खोजना प्रारम्भ किया। तत्पश्चात् यूरोप के देशों जर्मनी, फ्रांस एवं रूस में भी यह कार्य प्रारम्भ किया गया तथा यूरोपीय विज्ञान की नींव डाली गई। इन्होंने संस्कृत, फारसी, लातिनी, यूनानी, स्लाब, ल्यूतोनी, केल्ती इत्यादि को सम्बन्धित कर भाषा विज्ञान एवं पुरातत्व अध्ययन का एक नया मार्ग खोजा।
 संस्कृत व्याकरण में पृथक ध्वनि हेतु पृथक शब्द, एक ध्वनि के लिए एक ही शब्द इसकी वैज्ञानिकता सिद्ध करती है। इसमें अंकगणित, बीजगणित एवं रेखागणित के पुट पूरी तरह दिखाई देते हैं। धन ऋण, गुणा, भाग, कोण, वर्ग इत्यादि इसके गणितीय होने की पुष्टि करते हैं जो कि वैदिक युग में आर्यों द्वारा ज्ञात था। बोधायन, आस्तम्भ इसके ज्वलन्त प्रमाण हैं। आर्यभट्ट द्वारा, ज्या कोटिज्या इत्यादि की खोज नक्षत्रों की सही गति बतलाती है। इसी का परिणाम हाल में भारत द्वारा किए गए चन्द्रयान -2 मिशन भी है। इस भाषा ने वर्तमान अंकक्रम की नींव रख सम्पूर्ण विश्व में गणित एवं ज्योतिष की नींव रखी। ज्योतिष का विचार भारत में वैदिक काल से ही था। इसी प्रकार भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में संस्कृत के महान विद्वान जैसे आयुर्वेद-सुश्रुत भौतिक शास्त्री वराहमिहिर, गणितीय विद्वान ब्रहमगुप्त, रसायनशास्त्री नार्गाजुन, आयुर्वेद-वाग्भट्ट, ज्योतिषाचार्य भास्काराचार्य आदि हुए। इसी प्रकार संस्कृत की कई शाखाएं विज्ञान की शाखाओं से जुड़ी थीं जैसे दर्शन भौतिकी से, भूगोल ऋग्वेद की प्राकृतिक घटनाओं से, सांख्य अणु परमाणु आदि वैज्ञानिक गतिविधियों से, अथर्वेद और आयुर्वेद से जुड़े हैं। इसी प्रकार वनस्पति शास्त्र को भेषज भी कहा जाता है। वास्तुकला एवं चित्रकला के लिए मत्स्य पुराण, अग्नि पुराण, भविष्य पुराण आदि संस्कृत भाषा के ग्रन्थ प्रसिद्ध हैं। यह भाषा कम्प्यूटर के लिए ’जावा’ से अधिक कारगर एवं वैज्ञानिक है।
 इसके अतिरिक्त आधुनिक युग में जो नैतिकता का क्षरण हो रहा है, अवसाद ग्रस्तता व्यक्ति में बढ़ती जा रही है, संस्कृत भाषा इस समय एक कारगर औषधि का कार्य कर रही है। अतः सभी व्यक्ति को
 मिलजुलकर एक साथ एक जुट होकर सामूहिक हित के लिए कार्य करना चाहिए तभी सार्थक वाक्य होगा।

References

Published

2020-09-29