दिव्यांगंगों ें के सामाजिक क्षेत्रेत्र में ें सरकारी एवं गैरैर सरकारी संगंगठनों ें की भूूिमिकाओं ें का तुलुलनात्मक अध्ययन

Authors

  • डाॅ0ॅ0 जय शंकंकर प्रस्रसाद पाण्डेयेय एसोसिएट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग बी0एस0एन0वी0 पी0जी0 कालेज, लखनऊ Author
  • सन्दीप पाण्डेयेय शोध छात्र, समाजशास्त्र विभाग डी0ए0वी0 पी0जी0 कालेज, कानपुर Author

Keywords:

गैर सरकारी संगठन, सामाजिक, सरकारी संगठन।

Abstract

दिव्यांगता एक मानवाधिकार का विषय है तथा एक सामाजिक और विकासात्मक मुद्दा भी है। जो एक समावेशी दुनिया का निर्माण और उसे बढ़ावा देना चाहता है। जिसमें सभी दिव्यांग व्यक्ति अपने मानव अधिकारों का आनंद लेते हैं और अपनी पूरी क्षमता प्राप्त करते हैं। इस प्रकार के कार्यों में समस्याओं की प्रारंभिक पहचान और उसमें हस्तक्षेप करना प्रथम ध्येय होता है, जो समाज में समावेशन की बाधाओं को निर्धारित करते हैं। यहीे बाधाएँ दिव्यांग व्यक्तियों की सामाजिक भागीदारी, सेवाओं और अवसरों तक पहुँचने से उन्हें रोकते हैं। साथ ही, उन्हें उनकी पूर्ण क्षमताओं के विकास और उनके मूल अधिकारों का उपयोग करने से भी रोकते हैं। इसका तात्पर्य है कि दिव्यांगों को समावेशी शिक्षा, समुदाय की लामबंदी, बढ़ी हुई भागीदारी, चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक कारकों, सामाजिक और आर्थिक हस्तक्षेप के माध्यम से उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने के अवसर प्रदान कराना है।

References

Published

2020-09-29