प्रेमचंद की विरासत के संदर्भ में संजीव की कहानियाँ

Authors

  • डाॅ0 अजय बिहारी पाठक एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, कुँवर सिंह पी0जी0 काॅलेज, बलिया (उ0प्र0) Author

Keywords:

साहित्य, प्रेमचन्द, कहानी

Abstract

संजीव प्रेमचन्द की परम्परा के अŸयन्त महŸवपूर्ण कथाकार हैं। प्रेमचन्द पहले ऐसे कथाकार हैं जिन्होंने साहित्य को सीधे समाज से जोड़ा। संजीव ने उनकी परम्परा को आगे बढ़ाया। प्रेमचंद की परम्परा को आगे बढ़ाने का अर्थ है प्रेमचंद के बाद के भारत का यथार्थ चित्रण। स्वातन्त्र्योत्तर भारत का यथार्थ जो प्रेमचंद के बाद का है। बाद के कहानीकारों ने ऐसा किया है, तो हम कह सकते हैं कि प्रेमचंद की विरासत आगे बढ़ रही है लेकिन इसका मतलब कहीं से यह नहीं कि एक परम्परा में जो चीजें जिस रूप में घटित हुई हों उसी रूप में आगे भी चित्रित हों। प्रेमचंद ने अपने समय में अपने हिसाब से लिखा। बाद में लेखक बदली हुई परिस्थितियों में जीवन की सच्चाइयों को अपने नजरिये से देखते हैं संजीव के पास एक पैनी कथादृष्टि है जिससे वे समकालीन दुनिया के यथार्थ का अपनी कहानियों में चित्रण करते हैं। इसलिए प्रेमचंद की परम्परा के सन्दर्भ में जब हम उनके लेखन पर बात करते हैं तो यह भी चर्चा होनी चाहिए कि उन्होंने प्रेमचंद की परम्परा में क्या विकास किया, उनकी भाषा या शिल्प में क्या नयापन आयज्ञं

References

Published

2021-09-29