आधुनिक भारत में सामाजिक न्याय के पैरोकार: गाँधी एवं अम्बेडकर
Abstract
महात्मा गाँधी एवं डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर तकरीबन समकालीन थे। दोनों के दूरगामी लक्ष्य बहुत कुछ समान थे किन्तु गाँधी एवं अम्बेडकर के बीच अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक असहमति थी। उनके विचार, दृष्टिकोण एवं पद्धतियों में अंतर को देखते हुए यदि कहा जाय कि दोनों दो विपरीत धु्रवों का प्रतिनिधित्व करते थे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। गाँधी के सशक्त चिंतन एवं गरिमामय व्यक्तित्व के सम्मुख खड़े होने और उनका विरोध करने का साहस गिने-चुने लोगों में था। डाॅ0 अम्बेडकर ऐसे ही कुछ गिने-चुने लोगों में से थे। मूलभूत उद्देश्यों सहित कई प्रमुख मुद्दांे जैसे - स्वाधीनता, न्यायपूर्ण समाज की रचना, दलित एवं कमजोर वर्गों का उत्थान आदि पर इन दोनों महापुरुषों में व्यापक सहमति थी। कदाचित् दोनों का लक्ष्य एक सम्प्रभुता सम्पन्न राष्ट्र निर्माण की दिशा में था। यदि मतभेद थे तो मुख्यतः इनके बीच प्राथमिकता अथवा इन्हें प्राप्त करने की पद्धति से सम्बन्धित थे।