भारत के निर्माण में नेहरू की भूमिका
Keywords:
भारत विभाजन का दर्द, यथार्थवादी चिंतन, लोकतांत्रिक सिद्धान्त एवं योजनाबद्ध विकास।Abstract
नेहरू पश्चिमी सभ्यता के आदर्शों से प्रेरित एक बुद्धिवादी एवं यथार्थवादी चिंतक थे। स्वतंत्रता के पश्चात् नेहरू की सबसे बड़ी चिंता भारत को विश्व के उन्नतिशील राष्ट्रों के समकक्ष बनाने की थी। अपने राजनैतिक दर्शन में वह गांधी जी के काफी निकट रहते हुए अहिंसा की विचारधारा के पोषक थे। 1947 में जब ब्रिटिश सरकार ने भारत को स्वतंत्र घोषित किया तब नेहरू भारत के पहलेे प्रधानमंत्री बने। जिस स्थिति में ब्रिटिश सरकार ने जवाहर लाल नेहरू को सत्ता सौंपी वह बेहद संवेदनशील परिस्थितियांँ थी। नेहरू को जो भारत मिला था वह लाखों लोगों के रक्त से लिपटा हुआ था जहाँ एक ओर भारत विभाजन का दर्द था वहीं दूसरी ओर साम्प्रदायिकता का जहर वातावरण में घुला था। विभाजन के परिणामस्वरूप लाखों लोग घरों से बेघर हुए और उनके जान माल की सुरक्षा करना नेहरू के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। आधुनिक भारत के निर्माण के लिए योजनाबद्ध विकास की आवश्यकता थी जिसके लिए उन्होंने योजना आयोग का गठन किया। उनका विचार था कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास पर ही भारत का भविष्य निर्भर है। गुट निरपेक्ष देशों का संगठन बनाने में नेहरू की प्रमुख भूमिका रही। अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए नेहरू ने चीन से दोस्ती का हाथ बढ़ाया और पंचशील समझौता किया। नेहरू सही मायने में आधुनिक भारत के प्रथम निर्माता थे।