भारत में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के विकास का तुलनात्मक अध्ययन
Abstract
आधुनिक युग प्रतिनिध्यात्मक शासन प्रणाली का युग है और यह प्रणाली राजनीतिक दलों के अभाव में संचालित नहीं हो सकती। दल अपने प्रत्याशी को चुनाव में खड़ा करके जनता को अपनी इच्छानुसार अपना योग्य उम्मीदवार चुनने का सुअवसर प्रदान करते है। इसीलिये राजनीतिक दलों को शासन का चतुर्थ अंग कहा जाता हैं। न केवल लोकतन्त्र मे वरन् साम्यवादी अथवा फासिस्टवादी व्यवस्था में भी राजनीतिक दलों ने इतना महत्व अर्जित कर लिया है कि वहां दल व शासन एक ही हो गये है। लोकतन्त्र मे तो राजनीतिक दल उसके पहिये के समान है जो जनता की भावनाओं के निर्धारण व अभिव्यक्तिकरण की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते है। आज की प्रतिनिधिमूलक सरकार का सार यह है कि सरकार और संसद दोनो पर दल का प्रभावी नियंत्रण रहता है। विधान मण्डल और कार्यपालिका, सरकार और संसद केवल संवैधानिक आवरण है। यथार्थ शक्ति का उपयोग केवल राजनैतिक दल ही करते है। राजनैतिक दल लोकमत के निर्माण और अभिव्यक्ति के सर्वोत्तम साधन है, वे अमूर्त मतदाताओं को मूर्त रूप देते है। अतः दलीय व्यवस्था प्रतिनिधिमूलक शासन का आधार स्तम्भ ह