बी0एड0 प्रशिक्षु शिक्षकों की अध्ययन-आदतों का अध्ययन
Abstract
भारत एक विकासशील देश है और इसके सभी नागरिको ंका यह निरन्तर प्रयासरहता है कि हमारा देश विकसित राष्ट्रों की सूची में अपना स्थान सुनिश्चित कर ले। इसके लिए हमारे सम्पूर्ण समाज का शिक्षित होना अनिवार्य है। साथ ही यह आवश्यक है कि देश का प्रत्येक बालक व युवा अपनी सम्पूर्ण शिक्षा, ऊर्जा व चेतना का उपयोग सकारात्मक कार्यों में करे। इस शैक्षिक ऊर्जा व चेतना के विकास में बालकों की अध्ययन सम्बन्धी आदतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विद्यार्थी जिस वातावरण में रहते हैं, जैसी शिक्षा प्राप्त करते हैं, वैसी ही उनकी अध्ययन आदतें विकसित होती हैं। यदि बालको ंमें अच्छी अध्ययन आदतों का विकास होगा तो वे किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक कर लेगंेऔर उनका शैक्षिक स्तर भी बढ़ेगा। इसके विपरीत यदि बालकों में अध्ययन सम्बन्धी बुरी आदतों का समावेश हो तो उनमें मानसिक तनाव बढ़ेगा और उनका शैक्षिक स्तर भी गिरता चला जाएगा। बालकों मे बहुत सी बुरी आदतें, जैसे-पढ़ने के प्रति लापरवाही, एक विषय को ज्यादा समय तक पढ़ना, पढ़ने के प्रति लगन नहीं होना, कठिन विषयो ंपर ध्यान न देना, लेटकर पढ़ना आदि, जो उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। छात्रों में अध्ययन की आदतों को विकसित किया जाना उनके व्यक्तित्व के लिए तो आवश्यक है ही, साथ ही भावी जीवन के निर्माण के लिए भी आवश्यक है।