नयी सदी की चुनौतियाँ और प्राथमिक स्तर पर कार्यरत अध्यापकों में समायोजन
Abstract
शिक्षा मानव विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। इससे ही किसी समाज व्यक्ति व राष्ट्र का सर्वांगींण विकास होता है। वास्तव में शिक्षा ही वह माध्यम है जिसके द्वारा व्यक्ति में उन क्षमताओं का विकास होता है जिसके लिए वह योग्य होता है जैसे- स्मृति निरिक्षण तर्क समायोजन कल्पना विवेक आदि का विकास शिक्षा द्वारा ही सम्भव है। किसी भी शैक्षिक संस्था की गुणवत्ता वहां पर कार्यरत शिक्षकों की गुणवत्ता से परे हो ही नही सकती। अतएव शिक्षकों में समायोजन एक तरह से सभी क्षेत्रों के लिए मानव शक्ति तैयार करने वाले राष्ट्र-निर्माता, यूँ कहें तो वह योग्य नागरिक को तैयार करने वाला एक निर्माता के रूप में भी है। क्योकि एक शिक्षक में जितनी ही अच्छी समायोजन क्षमता होगी वह उतने ही अच्छे तरीके से अपने विद्यालयी परिस्थितियों में छात्रों की ज्ञान वृद्धि में सहायक हो सकता है। नयी सदी के इस परिवर्तनशील व नवाचारी दौर के साथ ही शिक्षा उत्पादों के हितधारी व्यक्तिगत व वैश्विक स्वरूप लिए हुए है। ऐसे में अध्यापकों के सामने अनेक समस्याएं व चुनौतियाँ व्याप्त है। छात्रों की अपेक्षाओं, मागों, वैश्वीकरण का प्रभाव उदारीकरण व निजी स्वामित्व का प्रभाव, कम्प्यूटर आधारित सूचना ज्ञान आदि के प्रभाव के कारण अध्यापक अपने अध्यापन कार्य में दिन-प्रतिदिन अनेकों चुनौतियों का सामना करता है इसलिए एक अध्यापक में समायोजन की क्षमता होना अपेक्षित हो, जो अध्यापक के समायोजन को सतत रूप से समकालीन विद्यालय समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप न केवल सबल बनाये बल्कि उसमे प्रभावी अध्यापन व नेतृत्व क्षमता का विकास करने में भी सामथ्र्य हो तभी जाकर समयानुकूल अध्यापक समायोजन क्षमता का अध्यापकों में विकास हो पायेगा।