अमीर खुसरो और उनका खािलकबारी

Authors

  • िशवम पा€डेय शोधाथ् िहदी िवभागए बी०एस०एन०वी०पी०जी०कॉलेज चारबाग लखनऊ Author
  • डॉ णव कु मार िम- एसोिसएट:ोफे सरए बी०एस०एन०वी० पी०जी० कॉलेज चारबाग लखनऊ Author

Keywords:

अमीरखुसरोए खड़ीबोलीए अरबीए िहत्रदीए फ़ारसीएग़ज़लए खािलकबारी आिद।

Abstract

आिदकालीन सािहथ्यिविवधताओ ं से भराह,आहै। इस काल के उरवतू दौर म  एक बह,त बड़े सािहिथ्यक ख्यिळथ्व का अवतरण
ह,आए िजत्रह  अमीर खुसरो के नाम से जाना जाता है। अमीर खुसरो का बचपनका नाम अबुल हसन था। लेिकन उनका उपनाम
खुसरो इतना मशहद्वर ह,आ िक असली नाम िछपसागयाऔर वे अमीर खुसरो नाम से ही िव्यात हो गए। वे िहंदी के अथ्यंत
उम्लेखनीय रचनाकार इस अथ म  भी ह। िक उत्रहने तेरहर्व. चौदहर्व सदी म  खड़ी बोली िहंदी का ष्िहंदवी के 9प म  सू
पात
िकया। गौरतलब है िक इस भाषा का नामकरण भी वयं उत्रहने ही िकयाए इस बात क जानकारी हम  अमीर खुसरो क फारसी
रचना ष्मसनवी नुह िसपहरष् तथा ष्मसनवी िकरानुसादैनष् से िमल जाती है।
वे अरबीए फारसीए तुकू और िहंदी के गहरे जानकार थे। उत्रहने अनेक ऐसी िवधाओ ं म  िहंदी म  रचना क जो उनके पहले नर्ह
िमलर्त । अत्रय शदि म  ऐसा कहा जा सकता है िक िहंदी भाषा म  दोहए गीतए गजल और मिसय क शुपआत उत्रहने ही क। वे
गाते भी थ।े िहदं ी ग़ज़ल को गाकर लोकिय बनाने का द्येय खसु रो को ही िदया जाता है। सावनए बरखाए फागुन आिद ऋतुओ ं पर
िलखे उनके गीत लोग क जुबान पर चढ़ गए। सूफ दरगाह म  उनक कख्वािलयाँ खूब लोकिय ह,ई। फारसी भाषा से िहंदी भाषा
के पहले शदिकोश ष्खिलकबारीष् या ष्िनसाबे जरीफ क रचना का द्येय भी अमीर खुसरो को ही है। उत्रहने अपने गुप मशहद्वर सूफ
संत हज़रत िनजामुहीन औिलया के कहने के बाद द्यी कृप्ण क जीवनी पर हालात दृ ए. कत्रहैयाष् नामक पुतक का लेखन िकया।
वे एक साथ सािहथ्यकारए इितहासकारए संगीत तथा सूफ िवचारधारा के साधक थे ।
यह उठता है िक िहंदी किवता के इितहास म अमीर खुसरो क िसि7 का आधार ीया है घ् दरअसल उनक पहेिलयए दो
सखुनेए मुक/रयएअनमेिलयाँ या ढकोसलेए िनसबत एसूफ फारसी.िहंदवी िमिद्यत गजल  और पबा सािखय या दोह ए िहंदवी गीत या
कख्वािलयए फारसी.िहंदवी िमिद्यत गज़ल  और पबाइय ने खूब धूम मचाई। इन सबम  उनका खािलकबारी जो िहत्रदी दृ फारसी का
एक छत्रदोब7 कोश है िजसने सािहथ्य जगत म  मागदशक क भूिमका बनकर थािपत ह,आ।

References

Published

2023-09-29