वैमश्वक पररप्रेक्ष्र् िें जलवार्ु पररवतयन एक चुनौती

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  • अचयना कुिारीए सहायक प्राध्याशपकाए िीण्बीण्एमण्एसण् कालेज ऑफ़ एजुकेशन Author

Keywords:

जलिायु पररितयनए चुनौमतयांए दूरगामी प्रभािए मिनाशकारी पररणामए ग्लोिल िाममंगए मानिीय गमतमिमधयां।

Abstract

जलिायु पररितयन हमारे समय की सिसे िडी चुनौमतयां में से एक है। मजसका पृ्िी और भािी पीमढ़यों पर दूरगामी प्रभाि पडेगा। मिनाशकारी पररणाम के साथ मानिीय गमतमिमधयां ितयमान ग्लोिल िाममंग प्रिृमि में महत्िपूणय योगदान दे रही हैं। जलिायु पररितयन को कम करने और अनुकूलन के मलए प्रभािी रणनीमत मिकमसत करने के मलए इनको समझना महत्िपूणय है। जलिायु पररितयन के मलए प्राकृमतक और मानिीय कारक दोनों ही उिरदायी है। सृमि के मिकास क्रम में अतीत से यह देखा गया है मक जलिायु में छोटे िदलाि से लेकर िडे िदलाि तक हुए हैं। आधुमनक जलिायु युग 11ए700 साल पहलेए आमखरी महम युग समाप्त होने पर शुरू हुआ था। शोध से पता चला है मक 1830 के दशक की शुरुआत में ही समुद्र का तापमान िढ़ गया था। औद्योमगक क्रांमत के िाद िायुमंडल में काियन डाइऑ्साइड िढ़ने के िाद महासागर तेजी से गमय होने लगे। प्राकृमतक कारकों के ऊपर तो हमारा िस नहीं है परंतु मानिीय कारकों पर काम करके हम जलिायु पररितयन के मलए प्रभािी रणनीमत मिकमसत कर सकते हैं। जलिायु पररितयन के मलए जन जागरूकता फैलाना अत्यमधक आिश्यक है। यमद प्रत्येक मनुष्य अपनी रोजमराय की काययशैली में िदलाि लाए तो जलिायु पररितयन पर गहरा प्रभाि पडेगा। यमद हम अपनी आिश्यकताओं को सीममत करें तो पयायिरण संरक्षण में हम सभी अपना भरपूर योगदान दे सकते हैं।

References

Published

2024-09-30