महिंदी िोि का स्वरूप एविं मवकास: एक दृमि

Authors

  • मिव् िपाण्डेर् शोधाथी शहन्दी शिभागए बी०एस०एन०िी० पी०जी० कॉलेजए चारबागए लखनऊ Author
  • डॉ प्रणव कुिार मिि प्रोफेसरए शहन्दी शिभागए बी०एस०एन०िी० पी०जी० कॉलेज चारबाग लखनऊ Author

Keywords:

शोधए मिश्वमिद्यालयए अन्िेषणए अनुसंधानए गिेषणाए त्य आमद।

Abstract

महिंदी िोि का स्वरूप एविं मवकासरू एकशोध एक अनुशामसत अध्ययन प्रणाली है मजसका एक मिधान या शास्त्र है। सोपामधक शोध को अनुशामसत रखने के मलए मिश्वमिद्यालय शोध दृ मनयम लागू करते हैं और शोधाथी को शोध. प्रमिमध या शोधशास्त्र का िोध और पालन कराने के मलए प्रत्येक शोधाथी को एक शोध. मनदेशक के मनदेशन में शोध कायय करना पडता है। शोध एक सुमिज्ञ मनदेशक के मनदेशन में शोध. प्रमिमध का सम्यक पालन करने िाले प्रमतभाशाली शोधाथी द्वारा मकसी मनमित मिषय पर मकया गया एक दृमि संपन्न मिश्लेषण मििेचन हैए मजसमें त्य अनुसंधान के स्तर पर अज्ञात तथा अल्प ज्ञात त्यों का अन्िेषण एिं भ्ांतज्ञात त्यों का संशोधन होता है। इसमें सत्यान्िेषण के स्तर पर त्यों के िगीकरण एिं मिश्लेषण के आधार पर मनष्कषय या सत्य तक पहुंचने की िस्तुमनष्ठ एिं तकयसम्मत साधना समामहत होती है। प्रस्तुत शोध लेख का उद्देश्य शोध के स्िरुप और उसके मिकास पर दृमिपात करते हुए शोध की अिधारणा को शोधमथययों के मध्य उसके िास्तमिक स्िरुप की पहचान कराना है। मजसके माध्यम से शोध के प्रत्येक पहलुओं पर मिचार मकया गया है। दृमि

References

Published

2024-09-30